नरनारायण-नारदसंवादः
Nara-Nārāyaṇa–Nārada Discourse on Vision, Elements, and Entry into Vāsudeva
नाभ्युत्थाने मनुष्याणां योगा: स्युर्नात्र संशय: । व्याधिभिश्व विमथ्यन्ते व्याधै: क्षुद्रमूगा इव,जैसे व्याध छोटे मृगोंको कष्ट पहुँचाते हैं, उसी प्रकार जब नाना प्रकारके रोग मनुष्योंको मथ डालते हैं, तब उनमें उठने-बैठनेकी भी शक्ति नहीं रह जाती, इसमें संशय नहीं है
人は起き上がる力すら失う—これに疑いはない。さまざまな病が彼らをかき乱し打ち砕くとき、彼らは猟師に苦しめられる小獣のように責め苛まれる。
नारद उवाच