Śānti-parva Adhyāya 3: Karṇa’s training under Rāma Jāmadagnya and the Bhārgava restriction on the Brahmāstra
राधेय: कर्ण इति मां प्रवदन्ति जना भुवि । प्रसाद कुरु मे ब्रद्वान्नस्त्रलुब्धस्य भार्गव,कर्ण परशुरामजीके शापके भयसे डर गया। अतः उन्हें प्रसन्न करनेकी चेष्टा करते हुए कहा--'भार्गव! आप यह जान लें कि मैं ब्राह्मण और क्षत्रियसे भिन्न सूतजातिमें पैदा हुआ हूँ। भूमण्डलके मनुष्य मुझे राधापुत्र कर्ण कहते हैं। ब्रह्मन! भृगुनन्दन! मैंने अस्त्रके लोभसे ऐसा किया है! आप मुझपर कृपा करें
rādheyaḥ karṇa iti māṃ pravadanti janā bhuvi | prasāda kuru me brahman astralubdhasya bhārgava ||
カルナは言った。「この地の人々は私をラーデーヤ、カルナと呼びます。おお、バラモンよ、バールガヴァよ、どうかお慈悲を。私は武器とその奥義を欲するあまり、かく振る舞いました。」
नारद उवाच