Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
संग्राममें शोभा पानेवाले वे सभी शूरवीर शत्रुका सामना करते हुए पराजित हुए हैं। उनमेंसे कोई भी पीठपर चोट खाकर या भागता हुआ नहीं मारा गया है ।। सर्वे त्यक्त्वा55त्मन: प्राणात् युद्ध्वा वीरा महामृधे । शस्त्रपूता दिवं प्राप्ता न तान् शोचितुमहसि,सभी वीर महायुद्धमें जूझते हुए अपने प्राणोंका परित्याग करके अस्त्र-शस्त्रोंसे पवित्र हो स्वर्गलोकमें गये हैं, अतः तुम्हें उनके लिये शोक नहीं करना चाहिये
sarve tyaktvātmanāḥ prāṇān yuddhvā vīrā mahāmṛdhe | śastrapūtā divaṃ prāptā na tān śocitum arhasi ||
風神ヴァーユは言った。「戦場を飾ったあの勇士たちは、敵に向き合って倒れた。背に傷を受けて死んだ者はなく、逃げて斃れた者もいない。皆、大戦において戦い抜き、命を捨てたのだ。武器と武士の務めによって清められ、天界に至った。ゆえに彼らを嘆くべきではない。」
वायुदेव उवाच