महाभूत–इन्द्रिय–मनस्–बुद्धि–अन्तरात्मा विवेकः | Discrimination of Elements, Senses, Mind, Intellect, and Inner Self
सांकृति: सुदिवा तण्डियथावासो5कृतश्रम: । अहोवीर्यस्तथा काव्यस्ताण्ड्यो मेधातिथिबुध:,तात! इस युगमें भी सर्वार्थदर्शी ब्राह्मणोंने इस वानप्रस्थ-धर्मका पालन एवं प्रसार किया। अगस्त्य, सप्तर्षिगण, मधुच्छन्द, अघमर्षण, सांकृति, सुदिवा, तण्डि, यथावास, अकृतश्रम, अहोवीर्य, काव्य (शुक्राचार्य), ताण्ड्य, मेधातिथि, बुध, शक्तिशाली कर्ण निर्वाक, शून्यपाल और कृतश्रम--इन सबने इस धर्मका पालन किया, जिससे ये सभी स्वर्गलोकको प्राप्त हुए
sāṅkṛtiḥ sudivā taṇḍi yathāvāso'kṛtaśramaḥ | ahovīryas tathā kāvyas tāṇḍyo medhātithir budhaḥ ||
ヴィヤーサは言った。「サーンクリティ、スディヴァー、タンディ、ヤターヴァーサ、アクリタシュラマ、アホー・ヴィーリヤ、カーヴィヤ(シュクラーチャーリヤ)、ターンディヤ、メーダーティティ、そしてブダ—これらの聖仙もまた、林住者(vānaprastha)の規律を守った。後の時代においてさえこのダルマを支え広めたゆえに、彼らは天界の諸世界へと至った。」
व्यास उवाच