भूय एव तु लोके5स्मिन् सद्वृत्ति कालहैतुकीम् | यया सन्त: प्रवर्तन्ते तदिच्छाम्यनुवर्तितुम्,अब पुनः इस संसारमें प्रत्येक युगके अनुसार जो शिष्ट पुरुषोंकी आचार-परम्परा रही है तथा जिसके अनुकूल सत्पुरुषोंका बर्ताव होता आया है, उसका मैं भी अनुसरण करना चाहता हूँ
しかし改めて、この世において、各時代の時宜にかなう正しき行いの伝統——聖者たちがそれに従って歩み、振る舞ってきたその道——を、私もまた踏み従いたいのです。
शुक उवाच