प्रलय-प्रक्रिया (Pralaya Process) — Guṇa-Withdrawal and Pratisaṃcara
श्रीस्वाच एष मे निहित: पादो यो<यं सत्सु प्रतिष्ठित: । एवं हि निहितां शक्र भूतेषु परिधत्स्व माम्,लक्ष्मीने कहा--इन्द्र! यह मैंने अपना चौथा पाद रखा। अब यह सत्पुरुषोंमें प्रतिष्ठित हुआ। इसी प्रकार तुम अब सम्पूर्ण भूतोंमें मुझे स्थापित करके सब ओरसे मेरी रक्षा करो
シュリー(ラクシュミー)は言った。「これがわが足である。善き人々のうちに置かれ、今やそこに堅く据えられた。ゆえに、シャクラ(インドラ)よ、このようにして、あらゆる生きとし生けるもののうちに我を安立し、四方より我を護れ。」
श॒क्र उवाच