Yoga, Nārāyaṇa as Supreme Principle, and the Emanation of Categories
Sāṅkhya-Yoga Outline
मृगैर्मुगाणां ग्रहणं पक्षिणां पक्षिभियर्यथा । गजानां च गजैरेव ज्ञेयं ज्ञानेन गृहते,उचित उपाय किये बिना कोई भी प्रयोजन सिद्ध नहीं होता है, जैसे जलमें रहनेवाले प्राणियोंसे जीविका चलानेवाले सूतके जाल बनाकर उनके द्वारा मछलियोंको बाँध लेते हैं, जैसे मृगोंके द्वारा मृगोंको, पक्षियोंद्वारा पक्षियोंको और हाथियोंद्वारा हाथियोंको पकड़ा जाता है, उसी प्रकार ज्ञेय वस्तुका ज्ञानके द्वारा ग्रहण होता है
mṛgair mṛgāṇāṃ grahaṇaṃ pakṣiṇāṃ pakṣibhir yathā | gajānāṃ ca gajair eva jñeyaṃ jñānena gṛhyate ||
ビーシュマは言った。「鹿は鹿によって捕らえられ、鳥は鳥によって捕らえられ、象は象によって捕らえられる。同じく、知るべきものは知によってのみ把握される。ふさわしい手段を用いずして目的は成就しない。正しい器のみが、求める果を確かなものとする。」
भीष्म उवाच