बक-गौतमाख्यानम् / The Baka–Gautama Account
On Gratitude and Friendship Ethics
न प्रियं नाप्यनुक्रोशं चक्रुर्भूतेषु भारत । त्रीनुपायानतिक्रम्य दण्डेन रुरुधु: प्रजा:,भरतनन्दन! वे न तो प्राणियोंका प्रिय करते थे और न उनपर दयाभाव ही रखते थे। वे साम, दाम और भेद--इन तीनों उपायोंको लाँचकर केवल दण्डके द्वारा समस्त प्रजाओंको पीड़ा देने लगे
ビーシュマは語った。「バーラタの子よ。彼らは生きとし生けるものに喜びを与えることもせず、憐れみの情も抱かなかった。サーマ(懐柔)、ダーナ(施与)、ベーダ(離間)という三つの方策を捨て、ただダンダ(刑罰)によって万民を苦しめた。」
भीष्म उवाच