Virūpākṣa’s Dāna and Gautama’s Burden — the approach of Rājadharma
परेषां यत्र दोष: स्यात् तद् गुहां सम्प्रकाशयेत् । समानेष्वेव दोषेषु वृत्त्यर्थमुपघातयेत्,जहाँ दूसरोंकी बदनामी होती हो, वहाँ उनके गुप्त दोषोंको भी प्रकट कर देता है और अपने तथा दूसरेके अपराध बारबर होनेपर भी वह आजीविकाके लिये दूसरेका ही सर्वनाश करता है
「他人の名を汚せる場となれば、隠された過ちさえ暴き立てる。しかも自分と他人の罪が同じであっても、生計のために他人の方を打ち倒し、滅びに追いやる。」
भीष्म उवाच