शल्मलि–पवनसंवादः
The Dialogue of Śalmali and Pavana
ददाह पावक: क्रुद्धो युगान्ताग्निसमप्रभ: । नाना प्रकारके वन्य पशुओंसे भरे हुए उस निर्जन वनमें वह इधर-उधर भटकने लगा। इतनेही में प्रचण्ड पवनके वेगसे वृक्षोंमें परस्पर रगड़ होनेके कारण उस वनमें बड़ी भारी आग लग गयी। आग की बड़ी-बड़ी लपटें ऊपरको उठने लगीं। प्रलयकालकी संवर्तक अग्निके समान प्रज्वलित एवं कुपित हुए अग्निदेव लता, डालियों और वृक्षोंसे व्याप्त हुए उस वनको दग्ध करने लगे
dadāha pāvakaḥ kruddho yugāntāgnisamaprabhaḥ |
ビーシュマは言った。怒れる火神は、劫末の大火にも比すべき光焔を放ち、その森を焼き始めた。烈風にあおられ、樹々は互いに擦れ合って大火を生じ、巨大な炎が天へと立ちのぼる。燃えさかり憤るアグニは、蔓草も枝も樹木もことごとく呑み尽くした——まさに世界が解体する時の滅びの火のごとく。
भीष्म उवाच