कपोती-विलापः स्वर्गसंयोगश्च
The Dove’s Lament and Celestial Reunion
यह भी सुना जाता है कि एक कबूतरने शरणमें आये हुए शत्रुका यथायोग्य सत्कार किया था और अपना मांस खानेके लिये उसको निमन्त्रित किया था ।। युधिछिर उवाच कथं कपोतेन पुरा शत्रु: शरणमागत: । स्वमांसं भोजित: कां च गति लेभे स भारत,युधिष्ठिरने पूछा--भरतनन्दन! प्राचीनकालमें कबूतरने शरणागत शत्रुको किस प्रकार अपना मांस खिलाया और ऐसा करनेसे उसे कौन-सी सदगति प्राप्त हुई
yudhiṣṭhira uvāca | kathaṃ kapotena purā śatruḥ śaraṇam āgataḥ | svamāṃsaṃ bhojitaḥ kāṃ ca gatiṃ lebhe sa bhārata ||
ユディシュティラは言った。「バーラタの末裔よ、いにしえに鳩は、庇護を求めて来た敵をいかにして迎え入れ、しかも己が身の肉を食べさせたのか。そうした行いによって、その鳩はどのような福徳の行き先を得たのか。」
युधिछिर उवाच