Śaraṇāgata-Atithi-Dharma in the Kapota Narrative (कपोत-आख्यानम्—शरणागतधर्मः)
उच्छिन्नकृषिगोरक्षा निवृत्तविपणापणा । निवृत्तयूपसम्भारा विप्रणष्टमहोत्सवा,छोटे-छोटे जलाशय सर्वथा सूख गये। जलाभावके कारण पौंसले बंद हो गये। भूतलपर यज्ञ और स्वाध्यायका लोप हो गया। वषट्कार और मांगलिक उत्सवोंका कहीं नाम भी नहीं रह गया। खेती और गोरक्षा चौपट हो गयी, बाजार-हाट बंद हो गये। यूप और यज्ञोंका आयोजन समाप्त हो गया तथा बड़े-बड़े उत्सव नष्ट हो गये
ucchinna-kṛṣi-gorakṣā nivṛtta-vipaṇāpaṇā | nivṛtta-yūpa-sambhārā vipraṇaṣṭa-mahotsavā ||
ビーシュマは語った。「衰微のその時、農耕と牛の保護は滅び、市と交易は止まった。祭柱(ユーパ yūpa)に象徴される祭祀の備えも絶え、吉祥の大祭は姿を消した。すなわち、生業・交換・祭祀・共同の祝祭という、ダルマを公に支える柱が崩れ去り、道徳と儀礼の解体を告げる世の相であった。」
भीष्म उवाच