Dasyu-maryādā and Buddhi-guided Rāja-nīti (दस्युमर्यादा तथा बुद्धिप्रधान-राजनीति)
पूजन्युवाच यदि काल: प्रमाणं ते न वैरं कस्यचिद् भवेत् । कस्मात् त्वपचितिं यान्ति बान्धवा बान्धवै्हतै:,पूजनी बोली--राजन्! यदि आप कालको ही सब क्रियाओंका कारण मानते हैं, तब तो किसीका किसीके साथ वैर नहीं होना चाहिये; फिर अपने भाई-बन्धुओंके मारे जानेपर उनके सगे-सम्बन्धी बदला क्यों लेते हैं?
Brahmadatta uvāca: yadi kālaḥ pramāṇaṃ te na vairaṃ kasyacid bhavet | kasmāt tv apacitiṃ yānti bāndhavā bāndhavair hataiḥ ||
プージャニーは言った。「王よ! もしあなたが、行いの決定権はただ時(カーラ)にあると見るなら、誰も誰に対しても怨みを抱くべきではありません。ではなぜ、親族が別の親族に殺されたとき、遺された者たちは報復を求めるのですか。」
ब्रह्मदत्त उवाच