आशा-कृशता उपाख्यानम्
The Episode on the Emaciation Caused by Hope
तस्मिन् निपतिते बाणे भूमौ ज्वलिततेजसि । प्रविवेश महारण्यं मृगो राजाप्यथाद्रवत्,जब राजाका वह तेजस्वी बाण पृथ्वीपर गिर पड़ा, तब मृग एक महान् वनमें घुस गया, राजाने उस समय भी उसका पीछा नहीं छोड़ा
tasmin nipatite bāṇe bhūmau jvalita-tejasi | praviveśa mahāraṇyaṁ mṛgo rājāpy athādravat ||
その輝き燃える矢が地に落ちるや、鹿は広大な森へと飛び込んだ。だが王はその時も追跡をやめず、なお走って追いすがった。
भीष्म उवाच