मयूरवद्राजधर्मः (Mayūra-vat Rāja-dharma) — The Peacock-Model of Protective Kingship
सब सेवकोंको उनके योग्य कार्यमें ही लगाना चाहिये। कर्मफलकी इच्छा करनेवाले राजाको चाहिये कि वह अपने सेवकोंको ऐसे कार्योंमें न नियुक्त करे, जो उनकी योग्यता और मर्यादाके प्रतिकूल पड़ते हों ।। यः प्रमाणमतिक्रम्य प्रतिलोम॑ नराधिप: । भृत्यान् स्थापयते<बुद्धिर्न स रञ्जयते प्रजा:,जो बुद्धिहीन नरेश मर्यादाका उल्लंघन करके अपने भृत्योंको प्रतिकूल कार्योंमें लगाता है, वह प्रजाको प्रसन्न नहीं रख सकता
yaḥ pramāṇam atikramya pratilomaṁ narādhipaḥ | bhṛtyān sthāpayate buddhir na sa rañjayate prajāḥ ||
ビーシュマは言った。行いの果を求める王は、家臣それぞれを、その能力と位分にかなう務めに就けねばならぬ。だが、分別を欠く支配者が、正しい規範を踏み越えて、配下をその適性と正当な限界に背く職務へと据えるなら、民を満ち足らせておくことはできない。
भीष्म उवाच