Kṣemadarśa–Kālakavṛkṣīya Saṃvāda: Counsel on Impermanence, Non-attachment, and Composure in Dispossession
ऑपनक्रात बछ। अर: - हाथी, घोड़े, रथ, पैदल, कोश और धनी वैश्य--ये सेनाके छः: अंग हैं। चतुर्राधिकशततमो< ध्याय: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति 42080 8; मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश युधिछिर उवाच धार्मिको<र्थानसम्प्राप्प राजामात्यै: प्रबाधित: । च्युत: कोशाच्च दण्डाच्च सुखमिच्छन् कथं चरेत्,युधिष्ठिरने पूछा--पितामह! यदि राजा धर्मात्मा हो और उद्योग करते रहनेपर भी धन न पा सके, उस अवस्थामें यदि मन्त्री उसे कष्ट देने लगें और उसके पास खजाना तथा सेना भी न रह जाय तो सुख चाहनेवाले उस राजाको कैसे काम चलाना चाहिये?
yudhiṣṭhira uvāca | dhārmiko 'rthān asamprāpya rājāmātyaiḥ prabādhitaḥ | cyutaḥ kośāc ca daṇḍāc ca sukham icchan kathaṃ caret ||
ユディシュティラは問うた。「祖父よ、王がダルマにかなっていながら、努力しても財を得られず、しかも大臣たちに悩まされ、さらに国庫と強制の力(軍勢/刑罰権)をも失ったならば――それでも安寧と福祉を求めるその王は、いかに身を処し、いかに行ずべきでしょうか。」
युधिछिर उवाच