Jaitrya-nimitta: Signs of Prospective Victory and the Priority of Conciliation (जयलक्षण-निमित्त तथा सान्त्व-प्रधान नीति)
द्वेष्यो भवति भूतानामुग्रो राजा युधिष्ठिर । मृदुमप्यवमन्यन्ते तस्मादुभयमाचरेत्,युधिष्ठिर! राजा यदि उग्रस्वभावका हो जाय तो वह समस्त प्राणियोंके द्वेषका पात्र बन जाता है और यदि सर्वथा कोमल हो जाय तो सभी उसकी अवहेलना करने लगते हैं; इसलिये उसे आवश्यकतानुसार उग्रता और कोमलता दोनोंसे काम लेना चाहिये
dveṣyo bhavati bhūtānām ugro rājā yudhiṣṭhira | mṛdum apy avamanyante tasmād ubhayam ācaret ||
ビーシュマは言った。「ユディシュティラよ、苛烈な王は衆生の憎しみの的となる。だが、あまりに柔和であれば人は侮る。ゆえに統治者は、時に応じて両方――剛と柔――を行うべきである。」
भीष्म उवाच