उपायधर्म-सेनायोगः
Upāya-dharma and Senāyoga: Expedient Ethics & Army Deployment
वहाँ व्यूह निर्माण करनेके लिये रथ और वाहनोंसे उतरना तथा पैदल सैनिकोंको छिपाकर रखना सम्भव है। वहाँ रहकर शत्रुओंके प्रहारका जवाब दिया जा सकता है और आपत्तिके समय छिप जानेका भी सुभीता रहता है ।। सप्तर्षीन् पृष्ठतः कृत्वा युध्येयुरचला इव । अनेन विधिना शत्रून् जिगीषेतापि दुर्जयान्,योद्धाओंको चाहिये कि वे सप्तर्षियोंको पीछे रखकर पर्वतकी तरह अविचलभावसे युद्ध करें। इस विधिसे आक्रमण करनेवाला राजा दुर्जय शत्रुओंको भी जीतनेकी आशा कर सकता है
saptarṣīn pṛṣṭhataḥ kṛtvā yudhyeyur acalā iva | anena vidhinā śatrūn jigīṣetāpi durjayān ||
ビーシュマは言った。「そこでは戦陣(ヴ्यूーハ)を組むために戦車や車両から降りることができ、歩兵の動きを隠すこともできる。そこに拠れば敵の打撃に応じて反撃でき、非常の時には身を潜める便もある。戦士たちは『七仙』(サプタリシ)を背後の守りとして据え、山のごとく動かずに戦え。この陣法と不動の交戦を用いるなら、攻めかかる王は、征し難い敵であってもなお打ち破る望みを持てよう。」
भीष्म उवाच