Gadā-yuddhe Bhīma–Duryodhanayoḥ Tumulaḥ Saṃprahāraḥ
Mace-duel’s intense exchange
नायं प्रवेष्टा नगरं पुनर्वारणसाह्दयम् । सर्पोत्सर्गस्थ शयने विषदानस्य भोजने,“अब फिर कभी यह हस्तिनापुरमें प्रवेश नहीं करेगा। भरतश्रेष्ठ! इसने जो मेरी शय्यापर साँप छोड़ा था, भोजनमें विष दिया था, प्रमाणकोटिके जलमें मुझे गिराया था, लाक्षागृहमें जलानेकी चेष्टा की थी, भरी सभामें मेरा उपहास किया था, सर्वस्व हर लिया था तथा बारह वर्षोतक वनवास और एक वर्षतक अज्ञातवासके लिये विवश किया था; इसके द्वारा प्राप्त हुए मैं इन सभी दुःखोंका अन्त कर डालूँगा
sañjaya uvāca | nāyaṁ praveṣṭā nagaraṁ punar vāraṇasāhdayam | sarpotsargasthaśayane viṣadānasya bhojane |
サンジャヤは言った。「彼は二度と都――クル族の愛するハスティナープラ――へ入ることはない。かつて彼は我が寝台に蛇を放ち、我が食に毒を混ぜたのだから。」
संजय उवाच