Vāg-yuddha and Nimitta-darśana before the Gadāyuddha
Verbal Duel and Omens
तस्मिन् महापुण्यतमे त्रैलोक्यस्य सनातने । संग्रामे निधन प्राप्य ध्रुवं स्वर्गे भविष्यति,“अतः नरेश्वर! हम सब लोग यहाँसे शीघ्र ही समन्तपंचक तीर्थमें चलें। वह भूमि देवलोकमें प्रजापतिकी उत्तरवेदीके नामसे प्रसिद्ध है। त्रिलोकीके उस परम पुण्यतम सनातन तीर्थमें युद्ध करके मृत्युको प्राप्त हुआ मनुष्य निश्चय ही स्वर्गलोकमें जायगा”
tasmin mahāpuṇyatame trailokyasya sanātane | saṅgrāme nidhanaṃ prāpya dhruvaṃ svarge bhaviṣyati |
サञ्जयは言った。「三界に名高い、最上の功徳を具え永遠なるその聖地において、戦いのうちに死を遂げる者は、必ずや天界に至る。」
संजय उवाच