द्वैपायनह्रदे दुर्योधनान्वेषणम् / The Search for Duryodhana at Dvaipāyana Lake
शोचन्त्यस्तत्र रुरुदु: क्रन्दमाना विशाम्पते । वे जहाँ-तहाँ हाहाकार करती हुई अपने ऊपर नखोंसे आघात करने, हाथोंसे सिर और छाती पीटने तथा केश नोचने लगीं। प्रजानाथ! शोकमें ड्रबकर पतिको पुकारती हुई वे रानियाँ करुण स्वरसे क्रन्दन करने लगीं ।। ततो दुर्योधनामात्या: साश्रुकण्ठा भृशातुरा:
śocantyas tatra ruruduḥ krandamānā viśāmpate | tato duryodhanāmātyāḥ sāśrukaṇṭhā bhṛśāturāḥ ||
サンジャヤは言った。「その場で彼女たちは嘆き、声をあげて泣き、苦悶の叫びを放った。おお、民の主よ。爪で身をかきむしり、手で頭と胸を打ち、髪をむしり取った。ついでドゥルヨーダナの家の女たちは――涙に喉を詰まらせ、激しい悲嘆に打ちのめされ――哀れを誘う慟哭をあげた。」
संजय उवाच