द्वैपायनह्रदे दुर्योधनान्वेषणम् / The Search for Duryodhana at Dvaipāyana Lake
दुर्योधनो महाराज कश्मलेनाभिसंवृत: । अपयाने मनश्षुक्रे विहीनबलवाहन:,उस समय उसे सम्पूर्ण दिशाएँ और सारी पृथ्वी सूनी दिखायी दी। वह अपने समस्त योद्धाओंसे हीन हो चुका था। महाराज! दुर्योधनने युद्धस्थलमें पाण्डवोंको सर्वथा प्रसन्न, सफलमनोरथ और सब ओरसे सिंहनाद करते देख तथा उन महामनस्वी वीरोंके बाणोंकी सनसनाहट सुनकर शोकसे संतप्त हो वहाँसे भाग जानेका विचार किया। उसके पास न तो सेना थी और न कोई सवारी ही
sañjaya uvāca | duryodhano mahārāja kaśmalenābhisaṃvṛtaḥ | apayāne manaḥ śukre vihīna-bala-vāhanaḥ ||
サञ्जयは言った。「王よ、ドゥルヨーダナは絶望に覆われ、心を退却へと向けた。兵力も乗り物も失い、戦場でパーンダヴァらが歓喜し、望みを遂げ、四方で獅子のように咆哮するのを見、また高き魂の勇士たちの矢の唸りを聞くと、悲嘆に打たれて、その場から逃れようと決した。」
संजय उवाच