Daiva–Puruṣakāra Saṃvāda
Kṛpa’s Counsel on Destiny and Human Effort
कृते पुरुषकारे तु येषां कार्य न सिद्धयति । दैवेनोपहतास्ते तु नात्र कार्या विचारणा,कार्यको आरम्भ न करनेसे कहीं कोई भी प्रयोजन सिद्ध नहीं होता है; परंतु पुरुषार्थ करनेपर भी जिनका कार्य सिद्ध नहीं होता है, वे निश्चय ही दैवके मारे हुए हैं। इसमें कोई अन्यथा विचार नहीं करना चाहिये
kṛte puruṣakāre tu yeṣāṃ kāryaṃ na sidhyati | daivenopahatās te tu nātra kāryā vicāraṇā ||
クリパは言った。真に力を尽くしてなお、ある者の企てが成就しないなら、その者はまさしく運命に打たれたのである。だが行いを起こさねば、いかなる目的も果たされぬ。この点にこれ以上の論は不要—運命がなお結果を覆し得ることを認めつつ、行動せよ。
कृप उवाच