अध्याय १ — न्यग्रोधवनोपवेशनम् तथा द्रौणिनिश्चयः
Night at the Banyan and Drauṇi’s Resolve
केचिन्नागशतप्राणा: केचित् सर्वास्त्रकोविदा: । निहता: पाण्डवेयैस्ते मन््ये कालस्य पर्ययम्,“कितने ही वीर सौ-सौ हाथियोंके बराबर बलशाली थे और कितने ही सम्पूर्ण अस्त्र- शस्त्रोंकी संचालन-कलामें कुशल थे; किंतु पाण्डवोंने उन सबको मार गिराया। मैं इसे समयका ही फेर समझता हूँ
kecin nāgaśatapraṇāḥ kecit sarvāstrakovidāḥ | nihatāḥ pāṇḍaveyais te manye kālasya paryayam ||
サンジャヤは言った。「彼らの中には百頭の象に等しい力を持つ者もいれば、あらゆる武器の扱いに通じた達人もいた。だがそれでも、パーンドゥの子らに討たれたのだ。これはただ時の転回――人の武勇のみならず、宿命がもたらした覆りであると私は見る。」
संजय उवाच