Dhṛtarāṣṭra’s Counsel on Restraint and the Pāṇḍavas’ Authorized Return (धृतराष्ट्र-उपदेशः)
सर्वैगुणैर्हि सम्पन्नामनुकूलां प्रियंवदाम् । यादृशीं धर्मकामार्थसिद्धिमिच्छेन्नर: स्त्रियम्,वह समस्त सदगुणोंसे सम्पन्न तथा मनके अनुकूल और प्रिय वचन बोलनेवाली है। मनुष्य धर्म, काम और अर्थकी सिद्धिके लिये जैसी पत्नीकी इच्छा रखता है, द्रौपदी वैसी ही है
「彼女はあらゆる徳を備え、心にかなって、言葉もやさしい。人がダルマ・カーマ・アルタの成就のために望む妻とは、まさにドラウパディのような者だ。」
युधिछिर उवाच