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Shloka 14

अध्याय ६४ — सभामध्ये क्रोध-निवारणम्

Restraint of wrath in the royal assembly

न श्रेयसे नीयते मन्दबुद्धि: स्त्री श्रोत्रियस्थेव गृहे प्रदुष्टा । ध्रुवं न रोचेद्‌ भरतर्षभस्य पति: कुमार्या इव षष्टिवर्ष:,जैसे श्रोत्रियके घरमें दुराचारिणी स्त्री कल्याणमय अग्निहोत्र आदि कार्योंमें नहीं लगायी जा सकती, उसी प्रकार मन्दबुद्धि पुरुषको कल्याणके मार्गपर नहीं लगाया जा सकता। जैसे कुमारी कन्याको साठ वर्षका बूढ़ा पति नहीं पसंद आ सकता, उसी प्रकार भरतवंशशिरोमणि दुर्योधनको निश्चय ही मेरा उपदेश रुचिकर नहीं प्रतीत होता

愚鈍なる者は吉祥の道へ導かれぬ。ヴェーダに通じたバラモンの家にあって、行いの汚れた女をアグニホートラなどの福徳の儀に携わらせ得ぬのと同じである。さらに、処女が六十歳の老夫を夫として好み得ぬように、バーラタ族の冠たるドゥルヨーダナもまた、わが諫言を必ずや快しとは感じまい。

विदुर उवाच