Adhyāya 52 (Sabhā-parva): Vidura Invites Yudhiṣṭhira to Hastināpura for the Dice Match
अभुक्तं भुक्तवद् वापि सर्वमाकुब्जवामनम् । अभुज्जाना याज्ञसेनी प्रत्यवैक्षद् विशाम्पते,राजन! उस यज्ञमें द्रौपदी प्रतिदिन स्वयं पहले भोजन न करके इस बातकी देखभाल करती थी कि कुबड़े और बौनोंसे लेकर सब मनुष्योंमें किसने खाया है और किसने अभीतक भोजन नहीं किया है
おお、民の主よ。その供犠においてヤージュニャセーニー(ドラウパディー)は日ごとに自ら先に食することなく、背の曲がった者や小人に至るまで、すべての人々のうち誰が食を得て誰がまだ得ていないかを、みずから確かめて見守っていた。
दुर्योधन उवाच