मागधगिरिव्रजप्रवेशः — Entry into Girivraja and Jarāsandha’s Protocol Inquiry
देवैरपि विसृष्टानि शस्त्राण्यस्य महीपते । न रुजं जनयिष्यन्ति गिरेरिव नदीरया:,“महीपते! जैसे नदीका वेग किसी पर्वतको पीड़ा नहीं पहुँचा सकता, उसी प्रकार देवताओंके छोड़े हुए अस्त्र-शस्त्र भी इसे चोट नहीं पहुँचा सकेंगे
devair api visṛṣṭāni śastrāṇy asya mahīpate | na rujaṃ janayiṣyanti girer iva nadīrayāḥ ||
王よ、たとえ神々が放つ武器であっても、彼に痛みを与えることはできぬ。激流の勢いが山を傷つけ得ぬがごとく。
श्रीकृष्ण उवाच