Chapter 15: Counsel on Initiative vs. Renunciation in the Rajasuya Project (सभापर्व, अध्याय १५)
विशाला बहुला भूमिर्बहुरत्नसमाचिता | दूरं गत्वा विजानाति श्रेयो वृष्णिकुलोद्वह,वृष्णिकुलभूषण! यह पृथ्वी बहुत विशाल है, अनेक प्रकारके रत्नोंसे भरी हुई है, मनुष्य दूर जाकर (सत्पुरुषोंका संग करके) यह समझ पाता है कि अपना कल्याण कैसे होगा
viśālā bahulā bhūmir bahuratnasamācitā | dūraṃ gatvā vijānāti śreyo vṛṣṇikulodvaha vṛṣṇikulabhūṣaṇa ||
ユディシュティラは言った。「ヴリシュニ族の俊傑よ、ヴリシュニの飾りたる者よ。この大地は広大にして豊かであり、さまざまな宝に満ちている。人は遠くへ旅し—善き人々と交わり、自らの地を越えた世を見て—はじめて、己の最高の益へ至る道を真に悟るのだ。」
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