Jarāsandha as Obstacle to the Rājasūya — Kṛṣṇa’s Strategic Genealogical Brief
Sabhā Parva, Adhyāya 13
युधिष्ठटिरस्तत: सर्वानर्चयित्वा सभासद: । प्रत्यर्चितश्न तै: सर्वेर्यज्ञायैव मनो दधे,तदनन्तर युधिष्ठिरने अपने समस्त सभासदोंका सत्कार किया और उन सब सदस्योंने भी उनका बड़ा सम्मान किया। अन्तमें (सबकी सम्मतिसे) उनका मन यज्ञ करनेके ही संकल्पपर दृढ़ हो गया
そののちユディシュティラは、 सभा( सभा सभा सभा)に列する者すべてをもてなし敬い、彼らもまた皆、厚く敬意を返した。ついに(衆人の同意を得て)彼の心は、祭祀を行うという決意に堅く定まった。
वैशम्पायन उवाच