दिशश्चव सैन्यं च शितैरजिह्ागै: परस्पर प्रावृणुतां सुदंशितौ । जैसे पूर्वकालमें देवताओंका असुरोंके साथ संग्राम हुआ था, उसी प्रकार पाण्डवोंका कौरवोंके साथ युद्ध होने लगा। अर्जुन और कर्णके बाणोंसे वह अत्यन्त दारुण तुमुल युद्ध आरम्भ होनेपर वे दोनों कवचधारी वीर अपने पैने बाणोंसे परस्पर सम्पूर्ण दिशाओं तथा सेनाको आच्छादित करने लगे
sañjaya uvāca |
diśaś caiva sainyaṃ ca śitair ajihāgaiḥ parasparaṃ prāvṛṇutāṃ sudaṃśitau |
サンジャヤは言った。「剃刀のごとく鋭く、蛇のごとき矢をもって、堅き鎧に身を包み、鋭き“牙”を備えた二人の勇士は、互いに撃ち交わしつつ、四方と軍勢とを覆い尽くした。いにしえ、神々がアスラと激突したように、今やパーンダヴァとカウラヴァは恐るべき轟然たる戦へと踏み入った。アルジュナとカルナの矢の雨の下で凄烈な戦いが始まるや、彼らの矢は戦場全体に帳を垂れるかのようで、戦は万物を包む武器の嵐と化した。」
संजय उवाच