Adhyāya 8: Saṃprahāra-varṇana and Bhīma–Kṣemadhūrti Dvipa-Yuddha
Combat Description and Elephant Duel
शोकार्णवे निमग्नो5हं भिन्ना नौरिव सागरे | जो पराक्रमशाली, समर्थ एवं शूरवीर नरेशोंद्वारा भी कभी जीता न जा सका, जिसने दुर्योधनकी वृद्धिके लिये समस्त भूमण्डलपर विजय पायी थी, जिसे अपना सहायक पाकर मगधनरेश जरासंधने भी सौहार्दवश शान्त हो यादवों और कौरवोंको छोड़कर भूतलके अन्य नरेशोंको ही अपने कारागारमें कैद किया था; उसी कर्णको सव्यसाची अर्जुनने द्वैरथयुद्धमें मार डाला, यह सुनकर मैं शोकके समुद्रमें डूब गया हूँ, मानो मेरी नाव बीच समुद्रमें जाकर टूट गयी हो || २५--२७ $ ।। त॑ वृष निहत॑ श्र॒त्वा द्वेरथे रथिनां वरम्
śokārṇave nimagno ’haṃ bhinnā naur iva sāgare | taṃ vṛṣaṃ nihataṃ śrutvā dvairathe rathināṃ varam ||
ヴァイシャンパーヤナは言った。「私は悲嘆の大海に沈んだ。まるで大海のただ中で舟が砕け散ったかのように。戦車武者の第一であるヴリシャ(カルナ)が、戦車同士の一騎討ちでサヴィヤサーチン・アルジュナに討たれたと聞き、私は悲しみに圧し潰されている。」
वैशम्पायन उवाच