एते परिघसंकाशा: पुण्यगन्धानुलेपना: । उद्धता रणशूराणां पात्यन्ते सायुधा भुजा:,“रणवीरोंकी ये अस्त्र-शस्त्रोंसहित उठी हुई भुजाएँ, जो परिघोंके समान मोटी तथा पवित्र सुगन्धयुक्त चन्दनसे चर्चित हैं, काटकर गिरायी जा रही हैं
ete parighasaṅkāśāḥ puṇyagandhānulepanāḥ | uddhatā raṇaśūrāṇāṃ pātyante sāyudhā bhujāḥ ||
これら戦の勇士の腕は――戦場で高く掲げられ、鉄の棍棒のように太く、聖なる香りの白檀の塗香をまといながら――武器を携えたまま斬り落とされ、地に落ちてゆく。
अजुन उवाच