कर्णपरर्वणि त्रयोचत्वारिंशदध्यायः (Karṇa-parva Adhyāya 43) — Kṛṣṇa’s Battlefield Assessment and the Reversal Around Bhīma
चेलापहारं कुर्वाणास्ताडयिष्याम भूयस: । 'मार्गमें तक्रके साथ पूए और सत्तूके पिण्ड खाकर अत्यन्त प्रबल हो कब चलते हुए बहुत-से राहगीरोंको उनके कपड़े छीनकर हम अच्छी तरह पीटेंगे”
celāpahāraṃ kurvāṇās tāḍayiṣyāma bhūyaḥ |
カルナは言った。「幾度となく、旅人の衣を剥ぎ取っているその最中にも、我らは彼らを容赦なく打ち据えるのだ。」
कर्ण उवाच