कर्णेन युधिष्ठिरानीकविदारणम् / Karṇa’s Breach of Yudhiṣṭhira’s Battle-Line
(त्वं देव शक्तो लोके5स्मिन् नियन्तुं प्रद्गुतानिमान् । वेदाश्वान्ू सोपनिषद: सारथिभर्भव न: स्वयम् ।। “देव! आप ही इस जगत्में इन भागते हुए उपनिषद्सहित वेदरूपी अश्वोंको नियन्त्रणमें रख सकते हैं; अतः आप स्वयं ही सारथि हो जाइये । योद्धुं बलेन सत्त्वेन वीर्येण विनयेन च । अधिक: सारथि: कार्यो नास्ति चान्दोडघिको भवात् ।। “बल, धैर्य, पराक्रम और विनय इन सभी गुणोंद्वारा जो रथीसे भी श्रेष्ठ हो, उसे ही युद्धके लिये सारथि बनाना चाहिये; दूसरा कोई ऐसा नहीं है जो भगवान् शंकरसे भी बढ़कर हो। स भवांस्तारयत्वस्मान् कुरु सारथ्यमव्ययम् | भवानभ्यधिक स्त्वत्तो नान्यो5स्तीह पितामह ।। 'पितामह! आप अक्षय सारथिकर्म कीजिये और हमें इस संकटसे उबारिये। आप ही सबसे श्रेष्ठ हैं; आपसे बढ़कर दूसरा कोई नहीं है। त्वं हि देवेश सर्वैस्तु विशिष्टो वदतां वर ।) स रथं तूर्णमारुह्मु संयच्छ परमान् हयान्,जयाय त्रिदेवेशानां वधाय त्रिदशद्विषाम् “वक्ताओंमें श्रेष्ठ देवेश्वरर आप सभी गुणोंसे श्रेष्ठ हैं; इसलिये देवद्रोहियोंक वध और देवताओंकी विजयके लिये तुरंत रथपर आरूढ़ होकर इन उत्तम घोड़ोंको काबूमें रखिये
duryodhana uvāca |
tvaṁ deva śakto loke 'smin niyantuṁ pradrutān imān |
vedāśvān sopaniṣadaḥ sārathir bhava naḥ svayam ||
yoddhuṁ balena sattvena vīryeṇa vinayena ca |
adhikaḥ sārathiḥ kāryo nāsti cānyo 'dhiko bhavāt ||
sa bhavāṁs tārayatv asmān kuru sārathyam avyayam |
bhavān abhyadhikas tvatto nānyo 'stīha pitāmaha ||
tvaṁ hi deveśa sarvais tu viśiṣṭo vadatāṁ vara |
sa rathaṁ tūṇam āruhya saṁyaccha paramān hayān |
jayāya trideveśānāṁ vadhāya tridaśadviṣām ||
ドゥルヨーダナは言った。「おお、神なる御方よ。この世でただあなたお一人だけが、ウパニシャッドを伴って奔りゆく—ヴェーダの駿馬のごとき—これらを御し得ます。ゆえに、どうか御自ら我らの御者となり給え。戦において御者は、力・不動の胆力・武勇・そして律ある謙譲において、戦士すら凌ぐ者であるべきで、あなたに勝る者はありません。おお祖父よ、この尽きぬ御者の務めを引き受け、我らをこの危難から渡し救い給え。ここにあなたを超える者はなし。おお諸神の主、言葉の最勝者よ、あなたは万徳に秀で給う。ゆえに直ちに車に乗り、最上の馬どもを制し、神々の勝利と神々の敵の滅亡のために働き給え。」
दुर्योधन उवाच