Jayadratha-rakṣā: Conch Signals and Encirclement of Arjuna
Chapter 79
कृच्छेषु या धारयतामात्मानं व्यसनेषु च । गति: शोकाग्निदग्धानां तां गतिं व्रज पुत्रक,“बेटा! जो लोग भारी-से-भारी कठिनाइयोंमें और संकटोंमें पड़नेपर तथा शोकाग्निसे दग्ध होनेपर भी धैर्य धारण करके अपने-आपको स्थिर रखते हैं, उन्हें मिलनेवाली गतिको तुम भी प्राप्त करो
サンジャヤは言った。「わが子よ、最も苛烈な苦難と災厄のただ中にあっても己を保ち、悲嘆の火に焼かれながらなお揺るがぬ者たちが得る、その同じ境地に汝も至らんことを。」
संजय उवाच