द्रोण–धृष्टद्युम्नयुद्धवर्णनम्
Drona–Dhrishtadyumna Battle Description
यः स्माद्यमनुपर्येति भूमिं कुर्वन्निमां सुखाम् । न चासीदू विक्रिया यस्य प्राप्य श्रियमनुत्तमाम्,जिन्होंने इस पृथ्वीको सुखमय बनाते हुए आदि युगके धर्मका जहाँ निरन्तर प्रचार किया था तथा परम उत्तम सम्पत्तिको पाकर भी जिनके मनमें किसी प्रकारका विकार नहीं आया
彼は太古のユガのダルマに従い、この大地を安楽ならしめ、その法を絶えず弘めた者である。しかも至上の富を得ても、心にいささかの変質も汚れも生じなかった。
नारद उवाच