तावक्षतौ प्रमुदितौ दध्यतुर्वारिजोत्तमौ । दृष्टवा प्रमुदितान् पार्थास्त्वदीया व्यथिता भृशम्,उन दोनोंके शरीरमें क्षति नहीं पहुँची थी। वे दोनों वीर आनन्दमग्न हो अपने उत्तम शंख बजाने लगे। कुन्तीके पुत्रोंको प्रसन्न देखकर आपके पुत्रोंके मनमें बड़ी व्यथा हुई
二人の身には損傷がなかった。勇士たちは歓喜に満ち、各々の最上の法螺貝を吹き鳴らした。クンティーの子らが喜びに湧くのを見て、汝の子らの心には激しい苦悩が生じた。
संजय उवाच