दुर्यूतदेवी गान्धारे प्रयात्वर्जुनमाहवे । “तुम इस वैरकी जड़ हो, अतः स्वयं ही जाकर अर्जुनका सामना करो, गान्धारीनन्दन! ये कपटलद्यूतके खिलाड़ी तुम्हारे मामा शकुनि भी बड़े बुद्धिमान् और क्षत्रियधर्ममें तत्पर रहनेवाले हैं। ये ही युद्धमें अर्जुनपर चढ़ाई करें
「この怨讐の根はそなたにある。ゆえに自ら赴き、戦場でアルジュナに相対せよ、ガーンダーリーの子よ。そなたの叔父シャクニ—狡猾なる賽の遊戯者—もまた大いに賢く、クシャトリヤのダルマに励む者だ。戦においてアルジュナへ攻めかかるのは、まさに彼であるべきだ。」
संजय उवाच