Previous Verse
Next Verse

Shloka 226

त्वत्सहायो नरव्यात्र लोकानां हितकाम्यया । वह भी संग्राममें सम्पूर्ण देवताओं और असुरोंद्वारा जीता नहीं जा सकता था। नरव्याप्र! मैं सम्पूर्ण लोकोंके हितके लिये और शिशुपाल एवं अन्य देवद्रोहियोंका वध करनेके लिये ही तुम्हारे साथ इस जगतूमें अवतीर्ण हुआ हूँ

おお、ナラヴィヤープラよ。汝を助けとして得たならば、戦場においては、あらゆる神々と阿修羅たちをもってしても、我を打ち破ることはできぬ。万界の利益のため、またシシュパーラならびに他の神々に背く者どもを討つためにこそ、我は汝とともにこの世に降り立ったのだ。

त्वत्from you
त्वत्:
Apadana
TypeNoun
Rootत्वद्
Form—, Panchami, Eka
सहायःhelper/ally
सहायः:
Karta
TypeNoun
Rootसहाय
FormPum, Prathama, Eka
नरव्यात्रO Naravyātra (vocative address)
नरव्यात्र:
TypeNoun
Rootनरव्यात्र
FormPum, Sambodhana, Eka
लोकानाम्of the worlds/people
लोकानाम्:
TypeNoun
Rootलोक
FormPum, Shashthi, Bahu
हितकाम्ययाwith the desire for welfare
हितकाम्यया:
Karana
TypeNoun
Rootहितकाम्य
FormStri, Tritya, Eka

श्रीवायुदेव उवाच