रिक्तपाणिरन पश्येत राजान ब्राह्म॒णं स्त्रियम् । “अब तू कर्णकी तथा अपनी भी फिर ऐसी ही अवस्था देखेगा। जो अपने धर्म, अर्थ और काम तीनोंकी इच्छा रखता है, उसे राजा, ब्राह्मण और स्त्रीसे खाली हाथ नहीं मिलना चाहिये (इसीलिये तेरे मित्रका यह मस्तक मैं भेंटके तौरपर लाया हूँ)
「今や、おまえは同じ有様を見ることになる――カルナにも、そしておまえ自身にも。ダルマ・アルタ・カーマの三つを望む者は、王と婆羅門と女のもとへ空手で赴いてはならぬ(ゆえに、友の首を贈り物として持参したのだ)。」
संजय उवाच