द्रोणनिन्दाश्रवणं तथा सात्यकि–पार्षतविवादः
Hearing the reproach of Droṇa and the Sātyaki–Pārṣata dispute
द्रष्टणां प्रीतिजनन सर्वेषां तत्र भारत । गृध्रकाकबलोलूककड़्कगोमायुहर्षणम्,भारत! उस समय वहाँ मनुष्य और राक्षसमें बड़े जोरसे महान् संग्राम होने लगा, जो समस्त दर्शकोंका आनन्द बढ़ानेवाला और गीध, कौए, बगले, उल्लू, कंक तथा गीदड़ोंको हर्ष प्रदान करनेवाला था
おおバーラタよ、その戦いはそこに居合わせた見物人すべての歓びを誘い、また屍肉を食らう者—禿鷲、烏、鷺、梟、カンカ鳥、山犬—をも喜ばせた。
संजय उवाच