द्रोणपर्व — अध्याय 128: दुर्योधनस्य परसेनाप्रवेशः
Duryodhana’s Incursion and the Tumult of Battle
पूरितो वासुदेवेन संरब्धेन यशस्विना । नूनमद्य हतः शेते तव भ्राता धनंजय:,“भैया! इस समय पांचजन्य शंखकी जैसी ध्वनि सुनायी देती है और यशस्वी वासुदेवने क्रोधमें भरकर उस शंखको जिस तरह बजाया है, उससे जान पड़ता है, आज तुम्हारा भाई अर्जुन निश्चय ही मारा जाकर रणभूमिमें सो रहा है
その法螺貝は、怒りに燃える名高きヴァースデーヴァによって吹き満たされ、響きがあまねく広がった。「今日、そなたの兄弟ダナञ्जय(アルジュナ)は必ず討たれ、戦場に横たわっている。」
संजय उवाच