द्रोणपर्व — अध्याय 128: दुर्योधनस्य परसेनाप्रवेशः
Duryodhana’s Incursion and the Tumult of Battle
शक्तो होष रणे यत्तः पृथिव्यां सर्वधन्विनाम् । स्वबाहुबलमास्थाय प्रतिव्यूहितुमजजसा,“इस भूतलपर कोई ऐसा कार्य नहीं है, जो भीमसेनके लिये असहा हो। ये अपने बाहुबलका आश्रय ले रणक्षेत्रमें प्रययनशील होकर भूमण्डलके समस्त धनुर्धरोंका अनायास ही सामना करनेमें समर्थ हैं
彼は戦においてひとたび奮い立てば、この地上のあらゆる弓手に対して抗し得る。己が腕力を拠り所として、布陣された軍勢をもたやすく迎え撃つことができる。
संजय उवाच