Adhyāya 86: Irāvān’s Lineage, Cavalry Clash, and the Māyā-Duel Ending in Irāvān’s Fall
त॑ विजित्य रणे शूरं विक्रान्तं ख्यातपौरुषम् । अजेयं समरे वीरं यमेन वरुणेन च,राजन्! घटोत्कच अपने पौरुषके लिये विख्यात, पराक्रमी, शूरवीर था। वरुण और यमराज भी उस वीरको समरभूमिमें परास्त नहीं कर सकते थे। उसीको वहाँ रणक्षेत्रमें जीतकर भगदत्तका वह हाथी समरांगणमें पाण्डवसेनाका उसी प्रकार मर्दन करने लगा, जैसे वनैला हाथी सरोवरमें कमलिनीको रौंदता हुआ विचरता है
taṁ vijitya raṇe śūraṁ vikrāntaṁ khyātapauruṣam | ajeyaṁ samare vīraṁ yamena varuṇena ca, rājan |
サンジャヤは言った。「王よ、武勇で名高く、勇猛にして、戦ではヤマやヴァルナでさえ屈せしめ得ぬとされたあの英雄を打ち破るや、バガダッタの象は戦場でパーンダヴァ軍を踏みにじり始めた。まるで野の象が蓮の池を踏み荒らしつつ歩み回るように。」
संजय उवाच