भीष्मपर्व — अध्याय 54: फल्गुन-प्रतिरोधः, सौबली-व्यूह-विध्वंसः, दुर्योधन-भीष्म-संवादः
अब्रवीत् तत्र गोविन्दो हर्षयन् सर्वपाण्डवान् | ऐसा कहकर महामना युधिष्ठिर शोकसे व्याकुल-चित्त हो बहुत देरतक मनको अन्तर्मुख करके ध्यानमग्न बैठे रहे। युधिष्ठिरको शोकसे आतुर और दु:खसे व्यथितचित्त जानकर गोविन्दने समस्त पाण्डवोंका हर्ष बढ़ाते हुए कहा--
sañjaya uvāca | abravīt tatra govindo harṣayan sarvapāṇḍavān |
サンジャヤは言った。そのときゴーヴィンダが語り、パーンドゥの子らすべてを喜ばせた。高潔なるユディシュティラが悲嘆に圧され、心を内に向けて久しく沈思黙考しているのを見て、クリシュナはパーンダヴァたちに語りかけ、戦の重荷のただ中にあってもダルマへの堅固さへと彼らを導き、気勢を奮い立たせたのである。
संजय उवाच