Chapter 51: Saṃdhyākāla-saṃhāra
Evening Withdrawal after Arjuna’s Counter-Advance
भिन्नमर्मा शरशतैश्छिन्नहस्त: स वारण: । भीममार्तस्वरं कृत्वा पपात च ममार च,सैकड़ों बाणोंसे उसके मर्म विद्ध हो गये थे और उसकी सूँड़ भी काट डाली गयी। इससे भयंकर आर्तनाद करके वह गजराज भूमिपर गिरा और मर गया
bhinnamarmā śaraśataiś chinnahastaḥ sa vāraṇaḥ | bhīmam ārta-svaraṃ kṛtvā papāta ca mamāra ca ||
サンジャヤは言った。数百の矢が急所を貫き、さらに鼻(象の鼻)を断ち切られたその大象は、身の毛もよだつ苦痛の叫びを放った。やがて地に崩れ落ち、そのまま息絶えた。この光景は、戦の残酷な決着を示す――いかなる巨なるものも、刃と刃の衝突のただ中で苦悶と死へと引きずり下ろされるのである。
संजय उवाच