भीष्मविक्रमदर्शनं तथा क्रौञ्चारुणव्यूहविधानम् | Bhīṣma’s Ascendancy and the Organization of the Krauñcāruṇa Formation
इस प्रकार यह गोपनीयसे भी अति गोपनीय ज्ञान मैंने तुझसे कह दियाः। अब तू इस रहस्ययुक्त ज्ञानको पूर्णतया भलीभाँति विचारकर जैसे चाहता है वैसे ही कर ।। सम्बन्ध-- इस प्रकार अर्जुनको सारे उपदेशपर विचार करके अपना कर्तव्य निर्धारित करनेके लिये कहे जानेपर भी जब अजुनने कुछ भी उत्तर नहीं दिया और वे अपनेको अनधिकारी तथा कर्तव्य निश्चय करनेगें असमर्थ समझकर खिन्रचित्त हो गये, तब सबके हदयकी बात जाननेवाले अन्तयमी भगवान् स्वयं ही अर्जुनपर दया करके कहने लगे-- सर्वगुह्मतमं भूय: शृणु मे परमं वच: । इष्टोडसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्
iti te jñānam ākhyātaṁ guhyād guhyataraṁ mayā | vimṛśyaitad aśeṣeṇa yathecchasi tathā kuru ||
かくして我は汝に、この知を説き明かした――あらゆる秘義よりもなお深き秘義を。いま汝はこれを余すところなく熟考し、しかるのち、望むままに行え。(倫理の上では、この教えは力で押しつけられるものではない。最高の勧告を受けたのち、聞く者は慎重に思惟し、ダルマにかなう自由な選択に自ら責任を負うよう求められる。)
अजुन उवाच