Adhyāya 41 — Yudhiṣṭhira’s Gurv-anumati and Strategic Counsel (युधिष्ठिरस्य गुर्वनुमतिः)
सम्बन्ध-- सत्त्त आदि तीनों गुण जिस समय अपने-अपने कार्यमें जीवको नियुक्त करते हैं. उस समय वे ऐसा करनेगें किस प्रकार समर्थ होते हैं->- यह बात अगले शलोकमें बतलाते हैं-- रजस्तमश्नाभि भूय सत्त्वं भवति भारत । रज: सत्त्वं तमश्नैव तम: सत्त्वं रजस्तथा,हे अर्जुन! रजोगुण और तमोगुणको दबाकर सत्त्वगुण*, सत्त्नुण और तमोगुणको दबाकर रजोगुण,“--वैसे ही सत्त्गुण और रजोगुणको दबाकर तमोगुण” होता है अर्थात् बढ़ता है;
rajas tamaś cābhibhūya sattvaṁ bhavati bhārata | rajaḥ sattvaṁ tamaś caiva tamaḥ sattvaṁ rajas tathā ||
アルジュナは言った。「おお、バーラタよ。ラジャスとタマスを抑え込むとき、サットヴァ(sattva)が優勢となる。同様に、サットヴァとタマスを抑え込むとき、ラジャス(rajas)が優勢となり、サットヴァとラジャスを抑え込むとき、タマス(tamas)が優勢となる。かくして、人の内なる生は、いずれのグナが覇を唱えるかによって形づくられ、判断と行い、そして道徳の明澄さを左右する。」
अजुन उवाच