किंचिच्छेषे दिनकरे पुत्राणां तव पश्यताम् | इस प्रकार आपके ताऊ भीष्म युद्धस्थलमें अर्जुनके तीखे बाणोंसे अत्यन्त विद्ध हो गये थे--उनका शरीर छिदकर छलनी हो रहा था। वे उसी अवस्थामें, जब कि दिन थोड़ा ही शेष था, आपके पुत्रोंके देखते-देखते पूर्व दिशाकी ओर मस्तक किये रथसे नीचे गिर पड़े || ८७ - हाहेति दिवि देवानां पार्थिवानां च भारत,पतमाने रथादू् भीष्मे बभूव सुमहास्वन: । भारत! रथसे भीष्मके गिरते समय आकाशमें खड़े हुए देवताओं तथा भूतलवर्ती राजाओंमें बड़े जोरसे हाहाकार मच गया
sañjaya uvāca | kiṃciccheṣe dinakare putrāṇāṃ tava paśyatām | hāheti divi devānāṃ pārthivānāṃ ca bhārata, patamāne rathād bhīṣme babhūva sumahāsvanaḥ ||
サンジャヤは言った。日がなおわずかに残る頃、汝の子らのまさに眼前で、毗湿摩はアルジュナの鋭い矢に幾度も貫かれ、頭を東に向けたまま戦車から落ちた。バーラタよ、毗湿摩が車より落ちゆくとき、天上の神々と地上の諸王のあいだに、「ああ、ああ」と大いなる嘆きの叫びが起こった。
संजय उवाच